सीता: वारियर ऑफ मिथिला – अमीश त्रिपाठी

सीता वारियर ऑफ मिथिला सारांश और समीक्षा अमीश त्रिपाठी द्वारा

 

 

शैली: पौराणिक कथा
श्रृंखला: राम चंद्र सीरीज़ – पुस्तक 2
लेखक: अमीश त्रिपाठी

सीता वारियर ऑफ मिथिला सारांशराम चंद्र सीरीज़ की दूसरी पुस्तक में अमीश त्रिपाठी ने सीता का एक नया रूप दिखाया है। वह यहाँ केवल एक सहायक पात्र नहीं हैं। बल्कि, वह एक निडर योद्धा और समझदार नेता के रूप में सामने आती हैं।

राजा जनक ने उन्हें बचपन में गोद लिया था। इसलिए, उन्होंने बचपन से ही न्याय, साहस और नेतृत्व के गुण सीखे। उनकी योग्यता के कारण वह मिथिला की प्रधानमंत्री बनीं। इसके अलावा, उन्होंने निष्पक्षता और मजबूती से शासन किया।

कहानी में मोड़ तब आता है जब रावण उन्हें अपनी योजनाओं के लिए खतरा मानता है। फिर, वह उनका अपहरण कर लेता है। यही घटना अगली पुस्तक की नींव रखती है।

अमीश ने इस कथा में प्राचीन पौराणिक तत्वों को आधुनिक विचारों के साथ जोड़ा है। उदाहरण के लिए, महिला सशक्तिकरण, समानता और नैतिक नेतृत्व जैसे विषय शामिल हैं। इस कारण, पुस्तक हर वर्ग के पाठकों को आकर्षित करती है।

 

निष्कर्ष: सीता: वारियर ऑफ मिथिला केवल पुनर्कथन नहीं है — यह सीता की विरासत का पुनर्निर्माण है, जो उन्हें शक्ति और बुद्धिमत्ता का सच्चा प्रतीक बनाता है।